Kagbhusandi Lake की रहस्यमयी बातें- [पूरी जानकारी-2024]

यहां पर आपको kagbhusandi, kagbhusandi lake, kagbhusandi trek, kagbhusandi ki katha, kagbhusandi story, kagbhusandi tal, kagbhusandi lake trek, kagbhusandi lake story, kagbhusandi kaun the इन सभी के बारे में बहुत विस्तार पूर्वक जानकारी मिलेगी।

Kagbhusandi Lake गढ़वाल क्षेत्र हिमालय के नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान पर स्थित है यह स्थान कंकुल दर्रे के पास 5230 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। संस्कृत में “काग” का अर्थ “कौवा” होता है। इस क्षेत्र में आपको कई ऊंची ऊंची हिमालय की चोटिया दिखाई देती है जोकि काफी मनमोहक होती है।

यहां पहुंचने वाले रास्ते के दौरान आपको कई चोटियों देखने को मिलेंगे जैसे कि चौखंबा, नीलकंठ, हाथी चोटी आदि। यहां का वातावरण अत्यंत मनमोहक अथवा शांतिपूर्ण है अगर आप Uttarakhand में आकर trekking करने की सोच रहे हैं तो आपको एक बार इस जगह पर जरूर आना चाहिए।

Kagbhusandi ki katha

Kagbhusandi Tal से जुड़ी कई पौराणिक कहानियां भी है। उनमे से एक कथा यह भी है कि एक बार वाल्मीकि जी जिन्हें हम रामायण के रचयिता स्वरूप संबोधित करते हैं उनसे पूर्व ऋषि कागभुशुण्डि ने इसी स्थान पर गिद्धराज गरुड़ को रामायण सुनाई थी। सर्वप्रथम श्री राम की कथा भगवान शिव ने माता पार्वती को सुनाई थी।

उस दौरान उस कथा को एक कौवे द्वारा भी सुन लिया गया था बाद में उसी कौवे का पुनर्जन्म काकभुशुण्डि के रूप में हुआ।काकभुशुण्डि को अपने पूर्व जन्म में भगवान शिव के मुख से सुनी हुई रामायण पूरी तरह याद थी और उन्होंने यह कथा अपने शिष्यों को सुनाई जिस प्रकार राम कथा का प्रसाद हुआ।

भगवान शिव के मुख से बोली गई रामायण को अध्यात्म रामायण के नाम से जाना जाता है। काकभुशुण्डि जी एक चिरंजीवी ऋषि थे जो कालनुरूप अवतार लेते हैं। उन्हें ऐसा वरदान मिला था कि वह समय और काल दोनों से परे हैं अर्थात उन्हें समय और काल दोनों ही प्रभावित नहीं करता जिस कारण उन्होंने रामायण को 11 बार एवं महाभारत को 16 बार दृश्य किया है। जिनमें प्रत्येक बार उन्होंने भिन्न-भिन्न घटनाएं होती हुई देखी।

Kagbhusandi lake Trek

Kagbhusandi lake Trek को शुरू करने के लिए दो यात्रा मार्ग हैं प्रथम गोविंदघाट से तथा दूसरा विष्णु प्रयाग से है। अगर आप यहां जाने की सोच रहे हैं तो आपको कम से कम 7 से 8 दिन का समय निकालकर यहां आना होगा ।
अगर वातावरण अच्छा रहा तो आप इसको 5 से 6 दिन में भी कर सकते हैं। Kagbhusandi lake Trek का स्तर मध्यम से कठिन होता है। यहां का तापमान -2°C से 15°C तक का हो सकता है।

अगर आप गोविंदघाट से जा रहे हैं तो वहां से आपको पुलना के लिए टैक्सी लेनी होगी जहां से आप काकभुशुण्डि झील के लिए आगे चढ़ाई कर सकती हैं ।

kagbhusandi lake

यह यात्रा मार्ग Valley Of Flower और हेमकुंड साहिब की यात्रा मार्ग से आरंभ किया जाता है। शुरुआत में यात्रा मार्ग सरल है, परंतु बाद में भ्यूंडार वैली से यात्रा मार्ग अत्यंत जटिल है क्योंकि यहां आए दिन landslides और तीव्र जल प्रवाह का खतरा बना रहता है।
आपको यहां एक सक्षम गाइड की आवश्यकता होगी जिन्हें यहां के रास्तों का पता हो। Trekking के दौरान आपको यहां का बेहद ही सुंदर नजारा देखने को मिलेगा। यहां आपको अलकनंदा की धारा देखने को मिलेगी जो कि हाथीघोड़ी पर्वत की ओर गमन कर रही होगी।

इसी धारा के समीप गमन करते-करते आप काकभुशुण्डि पहुंच जाएंगे। आप पूरे trek में दो जगह परेशान हो सकते हैं समरटोली और राज खरक।

जिन स्थानों पर आप कैंप लगाकर रात्रि में विश्राम कर सकती हैं। समरटोली से राज खरक करीब 9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। Trekking के दौरान आपको कई प्रकार के वन्यजीव जैसे कस्तूरी मृग, अनेक प्रकार के हिरण, जंगली पहाड़ी बिल्लियां दिखाई देंगे। इस रास्ते में आपको ग्लेशियर और लैंडस्लाइड जैसी कई मुश्किलों का सामना करना होगा जोकि अत्यंत जटिल है।

राज खरक में पहुंच कर आपको यहां स्थित, दो मंदिरों के दर्शन होंगे सिद्धनाथजी और विदनाथजी। इस trek के दौरान आपको एक और ताल दिखेगी जिसे छोटी मच्छी ताल के नाम से भी जाना जाता है। इसका नाम इसके आकार की वजह से पड़ा।

kagbhusandi lake

ताल का आकार मच्छी के समान होने के कारण इसका नाम छोटी मच्छी ताल रखा गया था ऐसी मान्यता है कि इस सरोवर तट पर योगिनी अप्सरा एवं गंधर्व का वास होता है जो यहां साधना उद्देश्य गमन करते हैं रात्रि समय कदापि आपको यहां योगिनी, अप्सरा जैसी छवियां प्रतीत होती है ।

आगे रास्ते में आपको एक बुग्याल मिलेगा जिसका नाम झंडेवाली धार है जो कैंपिंग करने के लिए अच्छा तो है परंतु वहां पानी का कोई भी स्रोत नहीं है। जिस कारण आप अगर विश्राम करने की सोच रहे हैं तो मच्छी ताल में ही करें और फिर इससे आगे की चढ़ाई प्रारंभ करें।

इस बुग्याल से आपको 300 मीटर की और चढ़ाई करनी होगी तो आप काकभुशुण्डि झील पर पहुंच जाएंगे। सरोवर के 100 मीटर ऊपर Camping spot है इसी स्थान पर कई तपस्वी अपनी साधना करते हैं यहां से सरोवर की दृश्य अलौकिक हैं।

ऐसा प्रतीत होता है कि मानो जैसे काल स्थगित हो गया हो और आप स्वयं काल अग्नि की उर्जा में तृप्त हो रहे हो। काकभुशुण्डि सभी झीलों में सबसे दिव्य है, यहाँ पर एक ऐसा द्वार जहां समय और स्थान मिलते हैं- एक क्वांटम मल्टीवर्स।

Best Time To visit kagbhusandi lake

पितृपक्ष में अमावस्या के आसपास इस पवित्रतम झील के दर्शन करना शुभ होता है। पितृपक्ष गणेश उत्सव के दौरान नष्ट हुई ऊर्जा को तर्पण के माध्यम से विभिन्न ब्रह्मांडीय अभिव्यक्तियों में प्रसारित करता है। पितृ अमावस्या पर देवी रचनात्मकता के लिए इस अपार संभावित ऊर्जा को उत्तेजित करने के लिए अवतरित होती हैं।

यह गूढ़ क्रॉसओवर सर्वोच्च सर्वोच्च राम (रां) बीज और समय की अग्नि, स्फेम (स्फेन) की ध्वनियों के माध्यम से समय और परिवर्तन का एक एल्गोरिदम है। यह एक असंभव पदयात्रा, इसे केवल गुरु और महादेव की कृपा से ही पूरा किया जा सकता है।

Kagbhusandi Tal कहाँ स्थित है?

Kagbhusandi Tal गढ़वाल क्षेत्र हिमालय के नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान पर स्थित है यह स्थान कंकुल दर्रे के पास 5230 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।

कागभुसंडी झील के नाम का क्या अर्थ है और वे कौन थे?

‘काग’ का अर्थ संस्कृत में कौआ होता है। काकभुशुण्डि जी एक चिरंजीवी ऋषि थे जो कालनुरूप अवतार लेते हैं। उन्हें ऐसा वरदान मिला था कि वह समय और काल दोनों से परे हैं अर्थात उन्हें समय और काल दोनों ही प्रभावित नहीं करता जिस कारण उन्होंने रामायण को 11 बार एवं महाभारत को 16 बार दृश्य किया है।

Kagbhusandi Tal Trek किस बात के लिए प्रसिद्ध है?

Kagbhusandi Tal Trek में आपको कई ऊंची ऊंची हिमालय की चोटिया दिखाई देती है जोकि काफी मनमोहक होती है।
यहां पहुंचने वाले रास्ते के दौरान आपको कई चोटियों देखने को मिलेंगे जैसे कि चौखंबा, नीलकंठ, हाथी चोटी आदि।

Kagbhusandi trek distance & difficulty level?

kagbhusandi lake कंकुल दर्रे के पास 5230 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। Kagbhusandi Tal Trek का स्तर मध्यम से कठिन होता है। यहां का तापमान -2°C से 15°C तक का हो सकता है।

Kagbhusandi ramayan katha?

सर्वप्रथम श्री राम की कथा भगवान शिव ने माता पार्वती को सुनाई थी।
उस दौरान उस कथा को एक कौवे द्वारा भी सुन लिया गया था बाद में उसी कौवे का पुनर्जन्म काकभुशुण्डि के रूप में हुआ।

मेरा नाम Dikshita Rawat है, और मैं उत्तराखंड की रहने वाली हूँ। JankariUttarakhand.com Blog के माध्यम से आप लोग उत्तराखंड से जुड़ी सारी जानकारी प्राप्त कर पाएंगे तथा उत्तराखंड की संस्कृति को और अच्छे से समझ पायेंगे।

Leave a Comment