Chandrabadni Temple Tehri Garhwal Uttarakhand

Chandrabadni Temple (चंद्रबदनी मंदिर) माता सती के 51 शक्तिपीठों में से एक है। यह एक धार्मिक स्थान है और यह मंदिर Uttarakhand राज्य के टिहरी गढ़वाल ज़िले के Jamnikhal गाँव में स्थित हैं। Chandrabadni Temple, Chandrabadni नमक पर्वत जिसे Chandrakoot पर्वत भी कहा जाता है, उसपे 2277 mtrs की ऊंचाई पर स्थित हैं।

Chandrakoot पर्वत पर स्थित है यह समुद्र तल से लगभग 2277 mtrs की ऊंचाई पर स्थित है। Chandrabadni मंदिर से Maa Surkanda devi, Kedarnath, Badrinath पर्वत की चोटियों का दृश्य दिखाई देता है। जो इस स्थान को बहुत ही सुंदर एवं मनमोहक बनाता है।

Location Of Chandrabadni Temple, Tehri Garhwal

Chandrabadni Temple जाने के लिए पहले आपको लक्ष्यमोली से बाई ओर जाने वाली सड़क की ओर जाना होता है, आप यहां आने के लिए Private Taxi या अपना स्वयं का वाहन की ला सकते हैं, लक्ष्यमोली से Chandrabadni Temple की दूरी 31 किलोमीटर है।

पहाड़ी क्षेत्र होने की वजह से यहां का सड़क मार्ग बेहद ही सुंदर है। यहां का दृश्य आप का मन मोह लेगा। यहां दूरदराज गांवों में बसे गांव का नजारा दिल को बहुत लुभाता है। ऐसा लगता है मानो यह पहाड़ हमको अपनी और बुला रहे हैं।

Chandrabadni Temple

Chandrakoot पर्वत का यह दृश्य काफी सुंदर व मनमोहक है। इस मंदिर के बाहर आपको पार्किंग की सुविधा भी मिल जाएगी। जहां से आपको मंदिर के लिए पैदल ही जाना पड़ेगा यह पैदल मार्ग केवल 20 मिनट का है, यहां रास्ते में आपको भक्तों की लंबी लंबी कतारें देखने को मिल जाएगी।

Chandrabadni Temple की ऊंचाई इतनी अधिक है, कि जहां तक आपकी नजर जाती है आपको वहां ऊंचे ऊंचे पर्वत देखने को मिलते हैं। लंबी चढ़ाई करके आप मां Chandrabadni के दरबार पहुंच जाएंगे। माता के मुख्य मंदिर जाने के लिए आपको यहां आपको 80 से 90 सीढ़ियां चढ़नी होगी।

मां Chandrabadni की ऐसी अलौकिक शक्ति है, कि आपको इतनी चढ़ाई करने की बात भी कोई थकान महसूस नहीं होगी। आपको यहां हमेशा मां Chandrabadni के भक्त लोग माता के वाद्य यंत्र में नृत्य करते हुए दिखेंगे।

Chandrabadni माता के ठीक नीचे भगवान शिव अपने नंदी के साथ विराजमान मिलेंगे। यहां हमेशा आपको माता के भक्तों की लंबी कतार मिलेगी। Chandrabadni Temple के गर्भग्रह में माता कि कोई विशेष आकृति या मूर्ति नहीं है, बल्कि यहां माता की पूजा एक श्री यंत्र(Shree Yantra) के रूप में की जाती है।

यह श्री यंत्र मंदिर की एक शीला पर बना हुआ है। जिसके ऊपर चांदी का एक बड़ा छत्र रखा गया है। जगद्गुरु शंकराचार्य ने श्री यंत्र से प्रभावित होकर ही इस सिद्धिपीठ की स्थापना की थी। आपने ऐसा सुना होगा, कि भक्त कभी भी मूर्ति के दर्शन नहीं करते, बल्कि श्री यंत्र के ही दर्शन कर सकते हैं।

जिसका कारण यह है कि मां सती का बदन भाग यहां गिरा था। जिस कारण देवी सती की मूर्ति के कोई भी दर्शन नहीं कर सकता। मान्यता है कि जो भक्त यहां भक्ति भाव से मन्नतें मांगने आता है, तो माता उनकी मन्नतओं को पूर्ण करती है।

Chandrabadni Temple trek

Chandrabadni मंदिर तक की यात्रा, trek लगभग 7 किलोमीटर लंबी है, और इसे पूरा करने में आपकी फिटनेस के स्तर और गति के आधार पर लगभग 3-4 घंटे लगते हैं। इस Trek में आपको ऊंचे ऊंचे पर्वत, वृक्ष आदि देखने को मिलते हैं।

Chandrabadni मंदिर का निकटतम village, Devprayag है। आप यहाँ Rishikesh या फिर Dehradun जैसे प्रमुख शहरों से बसों या टैक्सियों के माध्यम से Devprayag पहुँच सकते हैं।

Devprayag से, आप Base Camp तक पहुंचने के लिए टैक्सी किराए पर ले सकते हैं या आप बस ले सकते हैं। Base Camp, trek का प्रारंभिक बिंदु है। Base Camp के बारे में आप यहाँ के स्थानीय लोगो से पूछ सकते है या फर आप किसी tourist agency की भी मदद ले सकते है।

जब आप Base Camp पर पहुंच जाते हैं, तो आप Chandrabadni मंदिर तक trek शुरू कर सकते हैं। Trek करने के लिए आपके पास उपयुक्त ट्रैकिंग गियर होना चाहिए, जैसे आरामदायक जूते, पानी, स्नैक्स और प्राथमिक चिकित्सा किट जैसी आवश्यक वस्तुओं वाला एक बैकपैक।

Story Of Chandrabadni Temple, Tehri Garhwal

इस सिद्धि पीठ की स्थापना की पौराणिक कथा देवी सती से जुड़ी हुई है, पौराणिक कथा के अनुसार एक बार महाराजा दक्ष ने एक भव्य यज्ञ का आयोजन किया जिसमें उन्होंने सभी देवी देवताओं को आमंत्रण भेजा परंतु उन्होंने भगवान शिव को आमंत्रण नहीं दिया। परंतु जब माता सती को यह बात पता चली तो उन्होंने भगवान शिव से वहां जाने का निवेदन किया।

Chandrabadni Temple

परंतु शिव ने यह कहकर मना कर दिया कि बिना निमंत्रण के भी वहां नहीं जा सकते परंतु उन्होंने माता सती को वहां जाने की आज्ञा दे दी परंतु जब माता सती यज्ञ में पहुंची उन्होंने वहां देखा कि भगवान शिव को छोड़कर यज्ञ स्थल में सभी देवताओं का स्थान था। जब माता सती ने महाराजा दक्ष से इसका कारण पूछा तब महाराजा दक्ष ने शिव के बारे में अपमानजनक शब्द सुना डालें जिस पर क्रोध में आकर माता सती यज्ञ कुंड में अपना देह त्याग दिया।

सती के भस्म हो जाने का समाचार जब महादेव को मिला तो अत्यंत क्रोधित हो गए और उनके शरीर के तेज से वीरभद्र उत्पन्न हुए जिन्होंने भगवान शिव की आज्ञा से महाराजा दक्ष का सर काट कर यज्ञ में डाल दिया। जब भगवान शंकर यज्ञ स्थल में पहुंचे तो उन्होंने सती के वियोग में उनके शरीर को उठाया और ब्रह्मांड में इधर-उधर भटकने लगे।

तब श्री हरि विष्णु ने सृष्टि के विनाश की संभावना को देखते हुए अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के मृत शरीर के 51 टुकड़े कर डाले। जहां-जहां माता सती के अंग गिरे वह स्थान शक्तिपीठ कहलाए। मान्यता है कि चंद्रकूट पर्वत पर माता सती का बदन भाग यानी शरीर वाला भाग गिरा था जिस कारण इस स्थान का नाम चंद्रबदनी पड़ा था।

यह मान्यता है कि माता सती का बदन भाग इस स्थान पर गिरने से देवी की मूर्ति के कोई दर्शन नहीं कर सकता है। पुजारी भी आंखों पर पट्टी बांधकर मां Chandrabadni को स्नान कराते हैं।

आदि गुरु शंकराचार्य ने इस शक्ति पीठ की स्थापना की थी। महाभारत की कथा के अनुसार चंद्रकूट पर्वत पर गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा को फेंका गया था कहा जाता है, कि अश्वत्थामा आज भी हिमालय में विचरते हैं। प्राचीन ग्रंथों में यहां का वर्णन भुवनेश्वरी सिद्धि पीठ नाम से है।

मंदिर परिसर में सुबह से लेकर शाम तक शंखनाद और माता के गाजे बाजे घूमते रहते हैं। यहां पूजा के उपरांत शंख के पानी पीने का बड़ा महत्व माना गया है। इस शक्तिपीठ की शक्तियों का एहसास करने के लिए एक बार आप भी यहां जरूर आए। वैसे तो हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं परंतु नवरात्रों के समय यहां पर भक्तों की भी और भी अधिक हो जाती है। नवरात्रि के अष्टमी वह नवमी के दिन यहां पर नो दुर्गा के रूप में यहां कन्याओं की पूजा अर्चना की जाती है।

April माह में प्रत्येक वर्ष यहां एक भव्य मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें सभी भक्त माता के जयकारे लगाते हुए यहां पहुंचते हैं। मंदिर के निकट यात्रियों के विश्राम व भोजन की पूरी व्यवस्था है।

Where is Chandrabadni Temple located?

Chandrabadni मंदिर Uttarakhand राज्य के टिहरी गढ़वाल ज़िले के Jamnikhal गाँव में स्थित हैं। Chandrabadni Temple, Chandrabadni नमक पर्वत जिसे Chandrakoot पर्वत भी कहा जाता है, उसपे 2277 mtrs की ऊंचाई पर स्थित हैं।

Can I visit Chandrabadni Temple with family and children?

Yes, आप Chandrabadni मंदिर Family और बच्चों के साथ आ सकते हो।

How long is the trek to Chandrabadni Temple?

Chandrabadni मंदिर तक की यात्रा, trek लगभग 7 किलोमीटर लंबी है, और इसे पूरा करने में आपकी फिटनेस के स्तर और गति के आधार पर लगभग 3-4 घंटे लगते हैं।

What is the significance of Chandrabadni Temple?

Chandrabadni Temple (चंद्रबदनी मंदिर) माता सती के 51 शक्तिपीठों में से एक है। यह एक धार्मिक स्थान है। यहां माता की पूजा एक श्री यंत्र(Shree Yantra) के रूप में की जाती है। Chandrabadni Temple में मां सती का बदन भाग गिरा था।

What is the best time to visit Chandrabadni Temple?

Chandrabadni Temple आने का सही समय March से June और September से November महीने का है।

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