Best Places in Rishikesh

Rishikesh जिसे ऋषियों के धाम के नाम से भी जाना जाता है। जिसे योगा कैपिटल ऑफ वर्ल्ड (Yoga Capital of World ) भी माना गया है। ऋषिकेश हिंदू धर्म का बहुत ही पवित्र स्थल है जो टूरिस्ट और पर्यटको के लिए बहुत ही अच्छी घूमने की जगह है।

कहा जाता है की श्री राम ने रावण का वध करने के बाद ऋषिकेश में ही आकर तपस्या की थी और यहां का प्राचीन रघुनाथ मंदिर इस बात का साक्षी है।

अगर हम Rishikesh को एडवेंचर स्पोर्ट्स कैपिटल ऑफ इंडिया (Adventure Sports Capital of India) कहें तो गलत नहीं होगा। ऋषिकेश गढ़वाल हिमालय पर्वत की तलहटी में समुन्द्रतल से 409 मीटर की ऊँचाई पर स्थित और शिवालिक रेंज से घिरा हुआ है।

उत्तरी भारत में हिमालय की तलहटी में स्थित, इसे ‘गढ़वाल हिमालय का प्रवेश द्वार‘ और ‘विश्व की योग राजधानी’ के रूप में जाना जाता है।

यह Rishikesh शहर के उत्तर में लगभग 25 किमी (16 मील) और राज्य की राजधानी देहरादून से 43 किमी (27 मील) दक्षिण-पूर्व में स्थित है।ऋषिकेश का शांत वातावरण कई विख्यात आश्रमों का घर है | हर साल ऋषिकेश के आश्रमों में बड़ी संख्या में तीर्थयात्री ध्यान लगाने और मन की शांति के लिए आते है।

Best Places in Rishikesh

Rishikesh (ऋषिकेश) में ऐसी कौन सी जगह है जो आपको जरूर देखनी चाहिए :-

Lakshman Jhula (लक्ष्मण झूला)

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लक्ष्मण झूला Rishikesh की सबसे प्रमुख पर्यटक स्थल है जिसका निर्माण अंग्रेजों द्वारा उनके आराम के लिए किया था यह झूला तकरीबन 90 साल पुराना है।

जब 1923 में जब अंग्रेजों को इसकी जरूरत आन पड़ी तब उन्होंने इसका निर्माण किया और गंगा नदी के तेज बहाव के कारण इसकी नींव दो बार ढह चुकी थी और 1930 में कहीं जाकर इसका निर्माण पूर्ण हुआ।

यह झूला तकरीबन 450 मीटर लंबा है। माना जाता है कि राम के छोटे भाई लक्ष्मण ने यहां पर जूट का पुल बनाया था और उस पर बैठकर तपस्या की थी इसी कारण पुल का नाम लक्ष्मण झूला है।

लक्ष्मण झूले के साथ-साथ यहां पर राम झूला भी बहुत प्रसिद्ध है। जोकि सन 1993 में बना जो कि 750 फीट लंबा है।

यह झूला 24 घंटे खुला रहता है यहां आने का सबसे अच्छा समय सुबह 5:00 पर रात 10:00 बजे माना जाता है।

Shiva Statue (भगवान शिव की मूर्ति)

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परमार्थ निकेतन वह जगह है जहां से आप भगवान शिव की यह मूर्ति के दर्शन कर सकते हैं।

इस मूर्ति में आपको भगवान शिव बैठे हुए व ध्यान लगाते हुए मिलेंगे। जिसमें भगवान शिव के नेत्र बंद है। यह मूर्ति गंगा नदी के बीचो-बीच बसी है और यह नजारा बेहद ही सुंदर व दिल को छू लेने वाला है।

परमार्थ निकेतन बेहद ही शांत व सुंदर है। यह मूर्ति लगभग 14 फीट ऊंची है और यह जगह पर्यटको के बीच में प्रसिद्ध है।

नीलकंठ महादेव मंदिर

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यह एक बेहद ही प्राचीन मंदिर है जोकि ऋषिकेश के पास मणिकूट पर्वत पर स्थित है। प्राचीन पुराणों में यह बात कही गई है कि ऋषिकेश ही वह जगह है, जहां पर भगवान शिव ने समुंद्र मंथन के दौरान हलाहल यानी विष पिया था और विष पीने के बाद उनका कंठ नीला हो गया था जिस कारण उन्हें नीलकंठ नाम से भी जाना जाता है।

इसी वजह से मंदिर का नाम नीलकंठ महादेव मंदिर पड़ा इस मंदिर की दो प्रमुख बातें हैं

पहला यह मंदिर 3 पर्वतों से घिरा हुआ है जिनका नाम है मणिकूट विष्णुकूट व ब्रह्मकूट और दूसरा इस मंदिर की रचना बेहद ही सुंदर तरीके से की गई है इस मंदिर के मुख्य द्वार पर समुंद्र मंथन का दृश्य मूर्तियों के रूप में बना हुआ है। यह मंदिर ऋषिकेश से लगभग 32 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

यहां प्रातः सुबह 6:00 बजे ब्रह्म आरती होती है अगर आप ऋषिकेश में नीलकंठ महादेव मंदिर जा रहे हैं तो उस ब्रह्म आरती मैं जरूर जाए।

नीरगढ़ वॉटरफॉल

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यह वाटरफॉल तकरीबन 25 फुट ऊंचा वाटरफॉल है। जोकि 3 झरनों को मिलाकर बना हुआ है और यह देखने में बहुत ही मनमोहक है।

जब आप नीरगढ़ वॉटरफॉल्स जाएंगे तभी आप वहां की सुंदरता का अनुभव कर सकते हैं। यह जगह जाने के लिए आपको 15 मिनट की चढ़ाई चढ़ने पड़ेगी इस जगह की यात्रा ऋषिकेश में अन्य जगहों की यात्रा से बेहद ही अतुलनीय होगी।

यह ऋषिकेश से लगभग 8.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां जाने का सबसे अच्छा समय मॉनसून के बाद सितंबर से अक्टूबर के बीच का है। क्योंकि तभी आपको सबसे सुंदर वाटरफॉल देखने को मिलेगा।

Beatles Ashram (बीटल्स आश्रम)

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बीटल्स आश्रम जोकि चौरासी कुटिया के नाम से भी विख्यात है। ऋषिकेश की एक बहुत ही प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है।

यह आश्रम गंगा का पूर्वी किनारे में स्थित है, जोकि मुनी की रेती के विपरीत स्थित है। यह आश्रम तब विख्यात हुआ जब 1968 में अंग्रेजी रॉक बैंड द बीटल्स यहां पर ध्यान लगाने आए थे और यहीं पर उन्होंने अपने सबसे प्रसिद्ध गाने लिखें थे।

यह आश्रम 1990 में Forest Department के हवाले कर दिया गया था। जिसके बाद यह बीटल्स आश्रम के नाम से जाना गया सन 2015 में यह आश्रम आम नागरिकों के लिए खोला गया।

यह आश्रम सुबह 10:00 बजे से लेकर शाम 4:00 बजे तक खुला रहता है अगर आप यहां जा रहे हैं तो यहां ध्यान लगाना ना भूले।

Trimbakeshwar (त्र्यंबकेश्वर मंदिर)

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यह मंदिर 13 मंजिला मंदिर के नाम से भी बहुत मशहूर है।

त्र्यंबकेश्वर अर्थात तीन आंख वाले भगवान जोकि हिंदू पौराणिक कथा के अनुसाभगवान शिव है। त्र्यंबकेश्वर मंदिर से गंगा जी का नजारा अभूतपूर्व है।

इस मंदिर से आप लक्ष्मण झूला भी देख सकते हैं। त्र्यंबकेश्वर मंदिर की सीढ़ियां 13 मंजिला ऊपर भगवान त्र्यंबकेश्वर तक जाती है और यहां के स्थानीय लोगों का मानना है कि आदि गुरु शंकराचार्य ने यह मंदिर का निर्माण आठवीं व नौवी शताब्दी के आसपास किया था। इस मंदिर में केवल सीढ़ियां है। यहां पर किसी भी प्रकार की लिफ्ट मशीन नहीं है।

Bharat Mandir ( भरत मंदिर )

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भरत मंदिर जोकि Rishikesh के बीचो बीच स्थित है। जिस वजह से यहां आने के लिए आपको ज्यादा समय नहीं लगेगा। यह मंदिर रेलवे स्टेशन से लगभग 2 किलोमीटर Rishikesh बस स्टेशन से 1 किलोमीटर की दूरी पर है।

राबिया ऋषि व सोम ऋषि की कठोर तपस्या के बाद भगवान विष्णु ने उन से प्रसन्न होकर माया रूप में उनको इस स्थान पर दर्शन दिए थे और साथ ही साथ विष्णु जी ने कहा था कि कलयुग में यह मंदिर यही स्थापित होगा।

भरत मंदिर में 250 साल पुराने वट वृक्ष, पीपल का पेड़ व बेल का पेड़ है जोकि हिंदू ग्रंथों के हिसाब से भगवान विष्णु, भगवान शिव व ब्रह्मा जी के होने का साक्षी है। इसी कारण यह मंदिर श्रद्धालु व Tourists के बीच में काफी प्रसिद्ध है।

मंदिर को पूर्ण रूप से जाने के लिए आपको तकरीबन 1 घंटे का समय लग सकता है। इस मंदिर के भीतर ही एक संग्रहालय भी है।

यह मंदिर सुबह 5:00 बजे से 12:00 बजे तक खुला रहता है और शाम को 4:00 से 9:00 तक खुला रहता है इस मंदिर में बसंत पंचमी व महाशिवरात्रि के दिन आना बहुत ही शुभ माना जाता है।

Triveni Ghat ( त्रिवेणी घाट की आरती )

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माँ गंगा की आरती ऋषिकेश का एक बहुत ही पुराना धार्मिक संस्कार है। जो की बहुत ही पुराने समय से चलता आ रहा है। यह आरती त्रिवेणी घाट पर होती आई है। क्योंकि त्रिवेणी घाट एक बहुत ही प्रसिद्ध घाट है इसलिए आरती के समय यहां अधिक भीड़ रहती है।

यह घाट 1748 में पेशवा बाजीराव के द्वारा बनाया गया था और पेशवा बाजीराव वह पहले इंसान हैं जिन्होंने यहां पर पहली गंगा आरती की थी। माना जाता है अगर आप आरती में शामिल होते हैं तो आपके सारे पाप धुल जाते हैं।

त्रिवेणी घाट में आरती का समय शाम 6:00 बजे 7:00 बजे तक का है त्रिवेणी घाट के आसपास ऐसे बहुत से मंदिर और जगह है जैसे – गीता मंदिर व लक्ष्मी नारायण मंदिर में भी आप दर्शन करने जा सकते हैं।

Rishi kund (ऋषि कुंड)

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ऋषि कुंड त्रिवेणी घाट के पास रघुनाथ मंदिर में स्थित है। ऐसी मान्यता है कि इस कुंड का निर्माण कुब्ज ऋषि ने किया था। ऋषि कुब्ज की तपस्या से पहले यह कुंड हवन कुंड हुआ करता था इसलिए ही कुंड का आकार हवन कुंड के आकार की तरह है और ऋषि कुब्ज की तपस्या से प्रसन्न होकर यमुना जी इस कुंड में आई थी। इस बात का आज तक कोई भी पता नहीं लगा पाया है कि इस कुंड में यमुना जी का पानी कहां से आया।

हिंदू मान्यताओं के अनुसार जब भगवान राम ने रावण का वध किया था तो ब्राह्मण हत्या का दोष हटाने के लिए श्री रामजी न यहां पर तपस्या की इस कार्य कारण जब भी आप ऋषि कुंड जाएंगे तो आपको वहां भगवान राम के वह माता सीता के दर्शन होंगे।

यह माना जाता है कि ऋषि कुंड लगभग 400 से 500 वर्ष पुराना है इसीलिए यह जगह पर्यटकों के बीच बहुत प्रसिद्ध है। यह 24 घंटे खुला रहता है परंतु यहां जाने का सबसे अच्छा समय प्रातः काल का माना जाता है।

Chotiwala Restaurant (चोटी-वाला रेस्टोरेंट)

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अगर आप Rishikesh आ रहे हैं एक बार चोटी वाले के वहां खाना ना भूले। यह रेस्टोरेंट राम झूले के पास पड़ता है और यह रेस्टोरेंट 1958 में बना था तभी से इस रेस्टोरेंट को उनकी पीढ़ियां ही चलाते आ रही है। इसी कारण इस जगह का स्वाद 50 सालों से एक जैसा है।

यह Restaurant में एक चोटी वाले बाबा बैठते हैं जिन्होंने पर्यटको का खूब ध्यान आकर्षित किया हुआ हैं। जिस कारण ही यहां का नाम चोटी वाले बाबा Restaurant के नाम से प्रसिद्ध हुआ। यह जगह सुबह 7:30 से शाम 11:00 बजे तक खुला रहता है।

CONCLUSION

इस blog के माध्यम से आपने जाना की Rishikesh में कौन सी जगह सबसे अच्छी हैं, और आप कहा कहा जा सकते हैं। ऋषिकेश हिंदू धर्म का बहुत ही पवित्र स्थल है जो Tourist और पर्यटको के लिए बहुत ही अच्छी घूमने की जगह है।

आप यहां ऋषिकेश में बहुत सारी जगह पर घूम सकते हैं और ऋषिकेश में ऐसी कई जगह हैं जिन पर आपको जरूर जाना चाहिए और 5 से 6 दिन में आप इन सभी जगह पर आराम से घूम सकते हैं।

FAQs (Best Places in Rishikesh)

त्रिवेणी घाट में आरती का समय क्या है?

त्रिवेणी घाट में आरती का समय शाम 6:00 बजे 7:00 बजे तक का है।

Rishikesh का लक्ष्मण झूला कितना पुराना है?

लक्ष्मण झूला Rishikesh की सबसे प्रमुख पर्यटक स्थल है जिसका निर्माण अंग्रेजों द्वारा उनके आराम के लिए किया था यह झूला तकरीबन 90 साल पुराना है।

Rishikesh का 13 मंजिल मंदिर कोनसा है?

Rishikesh का 13 मंजिल मंदिर Trimbakeshwar (त्र्यंबकेश्वर मंदिर) है।
त्र्यंबकेश्वर अर्थात तीन आंख वाले भगवान जोकि हिंदू पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव है।

Rishikesh Nilkanth Temple कहाँ है?

यह एक बेहद ही प्राचीन मंदिर है जोकि ऋषिकेश के पास मणिकूट पर्वत पर स्थित है। प्राचीन पुराणों में यह बात कही गई है कि ऋषिकेश ही वह जगह है, जहां पर भगवान शिव ने समुंद्र मंथन के दौरान हलाहल यानी विष पिया था

Rishikesh Chotiwala Restaurant कहाँ है?

यह रेस्टोरेंट राम झूले के पास पड़ता है और यह रेस्टोरेंट 1958 में बना था तभी से इस रेस्टोरेंट को उनकी पीढ़ियां ही चलाते आ रही है। इसी कारण इस जगह का स्वाद 50 सालों से एक जैसा है।

rishi kund कहाँ हैं ?

ऋषि कुंड त्रिवेणी घाट के पास रघुनाथ मंदिर में स्थित है।

मेरा नाम Dikshita Rawat है, और मैं उत्तराखंड की रहने वाली हूँ। JankariUttarakhand.com Blog के माध्यम से आप लोग उत्तराखंड से जुड़ी सारी जानकारी प्राप्त कर पाएंगे तथा उत्तराखंड की संस्कृति को और अच्छे से समझ पायेंगे।

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