Ranikhet Uttarakhand

Uttarakhand राज्य में स्थित Ranikhet, एक बहुत ही सुन्दर Hill Station है। Ranikhet में ऐसी बहुत सी जगह है, यहाँ पर आपको धार्मिक स्थल, झील, नदी, हरे-भरे घास के मैदान, ऊंचे ऊंचे देवदार के वृक्ष, और झरने, आदि वगैरह देखने को मिल जाएंगे। यहां आने के बाद आपको एक अलग ही शांति का एहसास होगा।

Ranikhet पर आप बहुत सी Advanture Activities भी कर सकते हैं, जैसे – Paragliding, Water Ball, Flying Fox, Rock climbing, Trekking, Fishing, आदि और कई तरह के Activities का आनंद ले सकते हैं। सुंदरता की बात करें तो पूरा Uttarakhand ही बेहद अद्भुत है, लेकिन अगर आप प्रकृति से रूबरू होना चाहते हैं, तो आप Ranikhet जरूर आये।

Ranikhet में देश-विदेश से लोग घूमने आते हैं, और घूमने के अलावा यहां आप Trekking का भी लुफ्त उठा सकते हैं। Ranikhet के चारों तरफ पहाड़ और हरियाली है। वर्ष 1869 में अंग्रेजों द्वारा Ranikhet में कुमाऊं रेजिमेंट के मुख्यालय की स्थापना की गई थी। भारतीय सेना का कुमाऊं रेजिमेंट का मुख्यालय भी Ranikhet में ही स्थित है। मुख्यालय के साथ ही यहां पर कुमाऊं रेजिमेंट का सेंट्रल संग्रहालय भी है। रानीखेत में ऐसे कई प्रमुख धार्मिक स्थल है जहां पर आप जा सकते हैं, जैसे – Jhula Devi Mandir, Chaubatiya Garden, Heda Khan Baba Mandir, Golf Course Majkhali की वादियां, Binsar Mahadev Mandir व अन्य जगह है।  

Story Of Ranikhet

पौराणिक कथा के बारे में बात करें तो राजा सुखदेव की पत्नी रानी पद्मिनी के द्वारा Ranikhet की खोज की गई थी। वर्ष 1290 में जब वे दोनों इस मार्ग से गुजर रहे थे, तो इस घाटी की सुंदरता को देखकर रानी पद्मिनी मंत्रमुग्ध हो गई थी, और उन्हें इस जगह से प्यार हो गया था। राजा सुखदेव ने रानी की इच्छाओं को पूरा करने के लिए इस जगह पर एक महल का निर्माण करवाया जो उनका निवास स्थान बन गया था।

Ranikhet

रानी के द्वारा किए जाने वाले फैसले के कारण राजा ने इस जगह का नाम Ranikhet रख दिया, परंतु अब इस जगह पर कोई महल नहीं है और वर्तमान अभिलेखों में महल के कोई निशान नहीं है। ऐसा भी कहा जाता है कि अंग्रेजों ने यहां अपनी छावनी स्थापित की थी और महल को नष्ट कर दिया था। इसके बाद अंग्रेजों ने इसे एक Hill Station के रूप में विकसित किया।

इस स्थान पर वन्यजीवों की अनेक प्रजातियां पाई जाती है, व इसके साथ ही यहां का वातावरण सेब(Apple), आडू(Peach), और विभिन्न फल – फूलों के लिए काफी अच्छा माना जाता है। इस क्षेत्र में कई तरह की औषधीय जड़ी बूटियां पाई जाती है। इस जगह पर ज्यादातर Pine और Oak के पेड़ हैं, जो पूरे जंगलों में फैले हुए हैं। यहां अनेक प्रकार के जानवर भी है, जिनमें से हिमालयन काला भालू, कस्तूरी मृग, गौरल तेंदुआ, के अलावा काला तीतर, चकोर, मोनल, तीतर, जैसे अन्य पक्षियों की प्रजातियां भी पाई जाती है।  

आज के समय में Uttarakhand के पहाड़ों में Railway Line बिछाने के लिए तमाम कोशिशें हो रहे हैं, लेकिन ऐतिहासिक पर्यटक नगरी के नाम से विख्यात Ranikhet में ब्रिटिश शासन में ही जुड़ जाती और शायद यह Railway Line कुमाऊं की पहली Railway Line होती।

वे ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला से रानीखेत स्थानांतरित करना चाहते थे। लेकिन वर्ष 1872 में उनकी मृत्यु के बाद यह सपना पूरा नहीं हो सका। इसके बाद शिमला ही राजधानी रही और हिमाचल में Railway Lines का जाल बिछाया गया। आजादी के बाद भी लोगों ने Railway Line बिछाने के लिए सरकार से आग्रह किया परंतु अभी तक यहां पर रेलवे लाइन नहीं पहुंच पाई है।

places to visit in Ranikhet

Rani jheel (रानी झील)

यह रानीखेत से थोड़ी ही दूर स्थित है। यह बस स्टैंड से 1.4 किलोमीटर दूर है। आप चाहे तो यहां पैदल भी जा सकते हैं यहां पर आप वोटिंग भी कर सकते हैं।

Ranijheel

जिसका चार्ज मात्र ₹70 है यह एक कृत्रिम झील है जो कि रानीखेत में भारतीय सेना के परिषद द्वारा वर्षा जल संचयन के लिए बनाया था। अगर आप रानीखेत आए हैं तो यहां जाना ना भूले रानी झील के ठीक बगल में ही एडवेंचर पार्क स्थित है जिसमें आप कई प्रकार की एडवेंचर एक्टिविटीज कर सकते हैं।

रानी झील पर आप एडवेंचर एक्टिविटीज भी कर सकते है –

  • Boating – रानी झील पर बोटिंग करना बहुत मजेदार होता है। आप पेड़ल बोट या रोव बोट किराए पर ले सकते हैं और झील का आनंद ले सकते हैं।
  • Water Sports – वॉटर स्कीइंग, कायकिंग, वेकबोर्डिंग जैसे वॉटर स्पोर्ट्स में भाग लेना मजेदार होगा।
  • Trekking – झील के चारों ओर ट्रेकिंग ट्रेल हैं। आप इन पर ट्रेकिंग का आनंद ले सकते हैं और खूबसूरत नजारों का अनुभव कर सकते हैं।
  • Bird Watching – झील पर नौकायन के दौरान पक्षियों को देखना एक बहुत ही शांत और आनंदमय अनुभव होगा।

Jhula Devi Mandir (झूला देवी मंदिर)

Ranikhet से यह मंदिर 5 किलोमीटर दूर है और यह जाने के लिए आप कोई भी टैक्सी ले सकते हैं यह बहुत ही खूबसूरत और सुंदर जगह है।

Jhula Devi

यह मंदिर मां दुर्गा को समर्पित है एवं स्थानीय लोगों के अनुसार यह मंदिर 700 वर्ष पुराना है वर्तमान मंदिर परिसर सन 1935 में बनाया गया था।

कथाओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण क्षेत्र में रहने वाले जंगली जानवरों द्वारा उत्पीड़न से मुक्त कराने के लिए मां दुर्गा की कृपा बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया था। मंदिर परिसर में झूला स्थापित होने के कारण देवी को झूला देवी नाम से पूजा जाता है।

मां के झूला झूलने के बारे में एक और कथा प्रचलित है माना जाता है कि एक बार सावन मास में माता ने किसी व्यक्ति को स्वप्न में दर्शन देकर झूला झूले की इच्छा जताई ग्रामीणों ने मां के लिए एक झूला तैयार कर उसमें प्रतिमा स्थापित कर दी उसी दिन से यहां देवी मां झूला देवी के नाम से पूछे जाने लगी।

KRC woollens (के.आर. सी वूलन)

अगर आप कुछ ऊनी सामान लेना चाहते हैं तो आप KRC woollens सेंटर जा सकते हैं। यहां पर आपको हर प्रकार के गर्म कपड़े देखने को मिल जाएंगे यह वह जगह है जहां पर ऊनी कपड़े वह स्वेटर बनाई जाती हैं।

KRC woollens

अगर आप Shopping करना चाहते हैं तो आप यहां जरूर जाएं। इसके बाद रानीखेत के गोल्फ ग्राउंड भी घूमने जा सकते हैं रानीखेत का गोल्फ ग्राउंड पूरे भारत में फेमस है।

जो सबसे ऊंचाई पर स्थित गोल्फ ग्राउंड है। यह रानीखेत से 5.3 किलोमीटर की दूरी पर है इसमें किसी भी प्रकार का एंट्री टिकट नहीं है।

इन सभी के अलावा आप रानीखेत में पैराग्लाइडिंग भी कर सकते हैं पैराग्लाइडिंग के लिए आपको रानीखेत से लगभग 12 किलोमीटर दूर वाइल्डक्राफ्ट पैराग्लाइडिंग कैंप जाना होगा वहां जाकर आप पैराग्लाइडिंग को इंजॉय कर सकते हैं जिसकी फीस लगभग 3500 है।

Kumaun regimental Centre (कुमाऊँ रेजिमेंटल सेंटर)

कुमाऊं और नागा रेजीमेंट द्वारा संचालित यह एक म्यूजियम है। इस म्यूजियम में अलग-अलग युद्ध में इस्तेमाल किए गए कई अस्त्र प्रदर्शन के लिए रखे गए हैं।

Kumaun regimental Centre

यह संग्रहालय 1970 के दशक मैं बनाया गया था ताकि कुमाऊं क्षेत्र की विरासत को बचाया जा सके संग्रहालय में आपको फोटो, हथियार आदि का शानदार प्रदर्शन देखने को मिलेगा जो हमारी भारतीय सेना की ऐतिहासिक भव्यता और वीरता का परिचय देता है।

Chubattia apple garden ranikhet (चौबटिया गार्डन)

रानीखेत से यह लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। झूला देवी से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर है।

Chubattia apple garden ranikhet

यहां पर कई बड़े-बड़े उद्यान देख सकते हैं जैसे खुमानी उद्यान, आडू के बाग, शहतूत के बाग, बादाम के बाग, सेब के बाग। रानीखेत की खूबसूरती को बटोरे हुए हैं यह चौबटिया गार्डन।

यह बहुत ही प्रसिद्ध टूरिस्ट जगह है जहां बहुत दूर-दूर से टूरिस्ट घूमने आते हैं, यह एक प्राकृतिक गोल्फ कोर्स है।

यह एशिया के सबसे बड़े फलों के बगीचे में से एक है और यहां पर सरकार के द्वारा स्थापित किया गया एक फल संरक्षण केंद्र भी है।

चौबटिया गार्डन में आपको फल व फूलों की लगभग 200 से अधिक प्रजातियां देखने को मिल जाएंगी | इस जगह से आप हिमालय नंदा देवी नीलकंठ त्रिशूल आदि के विहंगम दृश्य आसानी से देख सकते हैं। इस गार्डन में 36 किसम के सेव उगाए जाते हैं।

Golu Devta Temple (ताड़ीखेत का गोलू देवता का मंदिर)

रानीखेत 8 किलोमीटर की दूरी पर बसे ताड़ीखेत गोलू देवता का मंदिर है स्थानीय लोग के अनुसार इस मंदिर की स्थापना क्यूरी के शासनकाल में हुई थी गोलू देवता यहां चौपाल लगाकर लोगों का न्याय करते थे।

golu devta mandir

इस मंदिर में लोग दूर-दूर से मन्नत मांगने आते हैं और मन्नतें पूरी होने पर भंडारे का आयोजन करते तथा घंटी चढ़ाते हैं मंदिर परिसर में हजारों घंटी हुई दिखाई देती है यह मंदिर ताड़ीखेत बाजार के बीचो बीच स्थित है रानीखेत के पास स्थित ताड़ीखेत अपनी प्राकृतिक सुंदरता और तथा धार्मिक स्थलों के लिए भी प्रचलित है यह क्षेत्र इतिहास के पन्नों पर अपनी पहचान बनाए हुए हैं हर त्योहार पर यहां के मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान होते हैं।


Haidakhan Babaji Temple (हेड़ाखान मंदिर)

यह मंदिर रानीखेत से लगभग 4 या 5 किलोमीटर दूर है। इस मंदिर से हिमालय की पहाड़ियों का सुंदर नजारा देखने को मिल जाता है।

Haidakhan Babaji Temple

यदि मौसम साफ है तो आपको दूर हिमालय की बर्फ से ढकी हुई मुख्य चुनौतियां जैसे पंचचुली, नंदा देवी चौखंबा आदि देखने को मिल जाएंगी इस मंदिर को संत बाबा हेड़ाखान ने स्थापित किया था।

आसपास पहाड़िया होने के कारण यहां का वातावरण शांतिपूर्ण रहता है। इस मंदिर में योग साधना की अनुभूति करने के लिए साल भर में कई श्रद्धालु आते हैं इस मंदिर में भक्त देश से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी आते हैं।

मेरा नाम Dikshita Rawat है, और मैं उत्तराखंड की रहने वाली हूँ। JankariUttarakhand.com Blog के माध्यम से आप लोग उत्तराखंड से जुड़ी सारी जानकारी प्राप्त कर पाएंगे तथा उत्तराखंड की संस्कृति को और अच्छे से समझ पायेंगे।

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