BHAI DHUJ | भाई दूज

सनातन धर्म में प्रतिवर्ष अनेक पर्व बड़ी धूमधाम से मनाए जाते हैं इसमें दीपावली मुख्य त्योहारों में से एक है यह एक 5 दिवसी पर्व है।

इन 5 दिनों में पहला पर्व है धनतेरस जिससे “धन त्रयोदशी” के नाम से भी जाना जाता है दूसरा दिन रूप चौदस, तीसरा मुख्य दिन है दीपावली और चौथा अन्नकूट अथवा गोवर्धन और पांचवा एवं अंतिम पर्व है भाई दूज जो भाई-बहन के संबंध को और भी मजबूत बनाता है ।

भाई दूज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को मनाया जाता है।

भाई दूज में इस्तेमाल होने वाली सामग्री

भाई धुज के लिए आपको आरती की थाली, टीका, चावल, नारियल, धूप, जोत, सर ढकने का कपड़ा या रुमाल और कलावा आदि चीजें होने चाहिए।

प्रातः काल स्नानादि कर भाई बहन को तैयार होकर आरती की थाल को पूरी तरह सजाकर भगवान गणेश और विष्णु की पूजा करनी चाहिए और चावल के आटे से चौक तैयार कर भाई को बैठाना चाहिए।

भाई को टीका करना चाहिए टीका करते समय यह मंत्र का उच्चारण करना चाहिए – ” गंगा पूजा यमुना को, यामी पूजे यमराज को, सुभद्रा पूजे कृष्ण को, गंगा यमुना नीर बहे, मेरे भाई की आयु बड़े “।

भाई बहन को उपहार दे अगर संभव हो तो भाई बहन दोनों को यमुना में स्नान करना चाहिए ऐसी मान्यता है इस शुभ दिन में जो भी भाई बहन यमुना नदी में स्नान करेंगे उन्हें अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। ऐसा यमराज ने यमुना को वरदान दिया था। तभी से इस दिन को यम द्वितीय या भाई दूज के रूप में मनाया जाने लगा।

भाई दूज क्यों मनाते हैं, और इसका क्या महत्व है?

भाई दूज के विषय में दो कथाएं प्रचलित हैं एक पौराणिक कथा है और दूसरी लोक कथा।

BHAI DOOJ

पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार सूर्य देव और उनकी पत्नी संध्या को दो संताने हुई जिनमें पुत्र यम और पुत्री यमुना थी इन दोनों का तेज बहुत ही अधिक था जिस कारण सूर्य की पत्नी संध्या इनका तेज सहन नहीं कर पाई इसलिए संध्या ने अपनी छाया उत्पन्न की और अपने दोनों बच्चों (यम और यमुना ) को उसे सौंप कर वहां से चली गई।

छाया को अपनी संतान से कोई मोह नहीं था परंतु दोनों भाई बहनों में आपस में बहुत प्रेम था यमुना हर बार अपने भाई को निमंत्रण देती परंतु यम अपनी व्यस्तथा के कारण उससे मिलने नहीं आ आते थे।

एक बार कार्तिक शुक्ल द्वितीय को यम अपनी बहन यमुना से मिलने चले गए अचानक ही अपने भाई को द्वार पर देखकर यमुना बहुत प्रसन्न हो गई और उसने अपने भाई का बहुत अच्छे से स्वागत सत्कार किया।

अपनी बहन के इस प्रकार स्नेह व सत्कार से प्रसन्न होकर यमुना को वरदान मांगने को कहा तब यमुना ने इस तिथि को उसके घर आने का वरदान मांगा और यम अपनी बहन की इच्छापूर्ति करने के लिए प्रति वर्ष इसी तिथि को मिलने आया करते थे तब से ही भाई दूज बनाने की प्रथा है ।

ऐसा माना जाता है कि जो भाई अपनी बहन से तिलक करवाता है उसे अकाल मृत्यु का कोई भय नहीं रहता । इस तिथि को यम द्वितीया तिथि के नाम से भी जाना जाता है । इस दिन बहुत से लोग यमुना नदी में स्नान करते हैं और अपने भाई बहन के सुख एवं समृद्धि जीवन की कामना करते हैं।

लोक कथा

लोक कथा के अनुसार एक वृद्ध महिला के दो संतान थे एक पुत्र एक पुत्री। बड़ी बहन का विवाह होने के पश्चात भाई ने अपनी मां से उससे मिलने की इच्छा प्रकट की तब मां ने कहा कि उसका व्यवहार तो तेरे लिए बहुत ही कठोर है ।

मेरे विचार से तुझे वहां नहीं जाना चाहिए। परंतु बेटे के बार-बार अनुरोध करने पर मां ने उसे अनुमति दे दी । जब भाई अपनी बहन से मिलने अपने घर से निकला तो उसे रास्ते में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा ।

सबसे पहले रास्ते में उसे एक नदी मिली, नदी ने कहा कि मैं तेरा काल हूं तब भाई ने कहा में बहुत वर्षों बाद अपनी बहन से मिलने जा रहा हूं जब में वापस आ जाऊं तब तुम मुझे डूबा देना फिर कुछ दूर आगे जाकर भाई को रास्ते में एक बाघ रोकता है और कहता है में तेरा काल हूं भाई ने उससे भी यही बात दोहराई कि वह अपनी बहन से मिलने जा रहा है ।

वापस आने पर उसको खा सकता है। यह सुनकर बाघ ने उसे जाने की अनुमति दे दी। और भाई अपनी बहन के द्वार पर पहुंच गया। वहां पहुंचते ही उसने अपनी बहन को बाहर से ही आवाज दी बहन अपनी घर में सूत कात रही थी।

भाई की आवाज सुनकर भी उसने कोई उत्तर नहीं दिया। तो उसे लगा बहन उससे बात नहीं करना चाहती शायद मां ठीक ही बोल रही थी। मुझे यहां नहीं आना चाहिए था।

जैसे ही भाई दुखी मन से जब जाने लगा तब बहन दौड़ कर बाहर आई और बहन ने बताया कि वह सूत कात रही थी इसलिए वह उत्तर नहीं दे पाई। इसके बाद बहुत प्यार से वह अपने भाई को अपने घर के अंदर ले गई और भाई को बहुत प्यार से भोजन कराती और सेवा करती है।

इस तरह दोनों ने कुछ दिन बड़े प्यार से व्यतीत किए फिर 1 दिन भाई ने बहन से कहा कि मुझे चलना चाहिए। मां घर पर अकेली है। उस रात बहन को स्वप्न में विधाता प्रकट होते हैं और वह कहते हैं कि तुम्हारे भाई पर अकाल मृत्यु है इस पर बहन भाई को छोड़ने जाती है रास्ते में उसे वही बाघ मिलता है बाघ जैसे ही भाई को खाने आता है तो वह उसको मांस का टुकड़ा लेकर आगे निकल जाती है।

फिर रास्ते में नदी मिलती है तो वह उसे चुनरी चलाती है इस पर नदी भी प्रसन्न होकर उसके भाई को जाने का रास्ता दे देती है इस प्रकार बहन भाई का हर संकट हर लेती है और वह खुशी-खुशी अपने घर आती है और इस दिन से भाई दूज मनाने की परंपरा है।

Conclusion

भाई धुज एक प्रमुख हिंदू त्योहार है जो भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है। यह त्योहार दीपावली के दो दिन बाद मनाया जाता है। इस दिन बहने अपने भाई को टीका करती है तथा उनकी लंबी आयु की कामना करती है।

भाई दूज का ये त्यौहार भारत के कई हिस्सों में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।

वर्ष 2023 में भाई दूज कब है?

वर्ष 2023 में भाई दूज 15 Nov को बुधवार के दिन मनाया जायेगा। भाई दूज प्रतिवर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को मनाया जाता है।

भाई दूज में इस्तेमाल होने वाली सामग्री कौन कौन सी हैं?

भाई धुज के लिए आपको आरती की थाली, टीका, चावल, नारियल, धूप, जोत, सर ढकने का कपड़ा या रुमाल और कलावा आदि चीजें होने चाहिए।

भाई दूज पर क्या किया जाता है?

भाई दूज पर प्रातः काल स्नानादि कर भाई बहन को तैयार होकर आरती की थाल को पूरी तरह सजाकर भगवान गणेश और विष्णु की पूजा करनी चाहिए और चावल के आटे से चौक तैयार कर भाई को बैठाना चाहिए।
भाई को टीका करना चाहिए टीका करते समय यह मंत्र का उच्चारण करना चाहिए – ” गंगा पूजा यमुना को, यामी पूजे यमराज को, सुभद्रा पूजे कृष्ण को, गंगा यमुना नीर बहे, मेरे भाई की आयु बड़े “।

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