Dhari Devi mandir | धारी देवी मंदिर

Dhari Devi Mandir एक प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है, जो Uttarakhand राज्य के गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र में श्रीनगर(Uttarakhand) और रुद्रप्रयाग के बीच अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है। 

यह श्रीनगर(Uttarakhand) से लगभग 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर की मान्यता है कि यहां पर स्थापित मां की मूर्ति दिन में तीन बार अपना रूप बदलती है।

मंदिर में माता की मूर्ति प्रातः काल के समय एक कन्या के रूप में दिखाई देती है, और वही मूर्ति दोपहर के समय एक युवती की तरह दिखाई देती है और साय काल में वृद्ध महिला की तरह दिखाई देती है।

यह तीनों दृश्य लोगों को हैरान कर देते हैं इस मंदिर में हर दिन ऐसे चमत्कार होते रहते हैं। जिस कारण ही यह मंदिर Uttarakhand दृश्य के मुख्य मंदिरों में शामिल है।

  • धारी देवी को शाकंभरी देवी के रूप में भी जाना जाता है।
  • वे भगवान शिव और देवी पार्वती की पुत्री मानी जाती हैं।
  • उन्हें दुर्गा का स्वरूप भी माना जाता है।
  • धारी देवी का प्रसिद्ध मंदिर गढ़वाल क्षेत्र में गौरीकुंड के पास स्थित है।
  • यहाँ पर हर साल नवरात्रि पर भव्य मेले का आयोजन किया जाता है।
  • धारी देवी अत्यंत शक्तिशाली मानी जाती है और उनकी पूजा से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

History Of Maa Dhari Devi Temple

ये मंदिर देवी काली को समर्पित है। यह मंदिर लगभग 600 वर्ष पुराना है, यह पहले अलकनंदा नदी के सामने एक नदी में स्थित था। श्रीमद् देवी भागवत के अनुसार, इस मंदिर को भारत के 108 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।

Maa Dhari Devi

साल 2013 में माता की इस मूर्ति को उसके मूल स्थान से हटाया गया था और कहते हैं कि इसी कारण केदारनाथ धाम की आपदा आई थी। जिसमें हजारों लोगों ने अपनी जान गवाई थी। ऐसा कहा जाता है कि माता धारी देवी की जो प्रतिमा है, 16 जून 2013 की शाम को अपने स्थान से हटाया गया था और ठीक उसकी कुछ घंटों बाद ही Uttarakhand में बाढ़ की आपदा आई थी।

हालांकि बाद में मूर्ति को उसके मूल स्थान पर पुनः स्थापित किया गया। यह मंदिर अलकनंदा नदी के बीच में स्थित है। यहां स्थित देवी मां के मंदिर का नाम धारी देवी है। यहां के गांव धारी गांव के नाम पर रखा गया था।

यह मान्यता है कि धारी गांव द्वापर युग से स्थित है ऐसा कहा जाता है कि पांडव भी इसी रास्ते से चारों धामों के लिए गए थे। तो पांडवों ने धारी देवी मैया की पूजा अर्चना की थी।

प्राचीन काल में यहां पर द्रौपदी शीला थी जहां पर द्रोपदी ने स्नान किया था परंतु वर्तमान समय में यह शीला जलमग्न हो गई है। धारी माता को Uttarakhand के चार धामों की संरक्षिका माना जाता है।

माता रानी सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती है जो भी यहां श्रद्धा भाव से आता है वह कभी भी खाली हाथ ही जाता। द्वापर युग से यह मंदिर स्थापित है कहा जाता है कि आदि गुरु शंकराचार्य भी यहां पर पूजा अर्चना किया करते थे।

यह मूर्ति किसने बनाई है इसका कोई प्रमाण नहीं है। यहां हर साल नवरात्रों के समय भक्तों की अधिक भीड़ रहती है। जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन करने हैं।

एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भीषण बाढ़ से मंदिर बह गया था. साथ ही साथ उसमें मौजूद माता की मूर्ति भी बह गई और वह धारो गांव के पास एक चट्टान से टकराकर रुक गई। ऐसा माना जाता है कि धारी माता एक ग्रामीण के सपने में आईं और उसे आदेश दिया कि धारी माता की मूर्ति को नदी से बाहर निकाला जाए और मूर्ति को वहीं रख दिया जाए जहां वह मिली थी और उसे खुले आसमान के नीचे रखा जाए।

Maa Dhari Devi

इस प्रकार, मंदिर को Dhari Devi mandir के रूप में जाना जाता है। मंदिर के ऊपरी आधे हिस्से में देवी धारी देवी की मूर्ति है और निचला आधा हिस्सा कालीमर्थ में स्थित है जहां उन्हें काली अवतार के रूप में पूजा जाता है। यह सड़क से सिर्फ 300 मीटर की दूरी पर है और आप अपना वाहन आसानी से पार्क कर सकते हैं।

Dhari Devi Mandir कैसे पहुंचे

धारी देवी मंदिर तक पहुंचने के लिए आप इन विकल्पों पर विचार कर सकते हैं:

  • ट्रेन से – नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है। वहां से आप टैक्सी या बस लेकर धारी देवी तक जा सकते हैं।
  • बस से – दिल्ली, हरिद्वार, ऋषिकेश आदि से नियमित बसें चलती हैं। ऋषिकेश बस अड्डे से आप धारी देवी के लिए बस पकड़ सकते हैं।
  • कार/टैक्सी से – दिल्ली से धारी देवी तक का सफर लगभग 300 किलोमीटर का है। अपनी कार या टैक्सी किराए पर लेकर आप यहाँ तक पहुंच सकते हैं।

धारी देवी कौन है?

धारी देवी को शाकंभरी देवी के रूप में भी जाना जाता है।
वे भगवान शिव और देवी पार्वती की पुत्री मानी जाती हैं।
उन्हें दुर्गा का स्वरूप भी माना जाता है।
धारी देवी का प्रसिद्ध मंदिर गढ़वाल क्षेत्र में गौरीकुंड के पास स्थित है।
यहाँ पर हर साल नवरात्रि पर भव्य मेले का आयोजन किया जाता है।
धारी देवी अत्यंत शक्तिशाली मानी जाती है और उनकी पूजा से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

धारी देवी मंदिर कितना पुराना है?

यह मंदिर लगभग 600 वर्ष पुराना है, यह पहले अलकनंदा नदी के सामने एक नदी में स्थित था। श्रीमद् देवी भागवत के अनुसार, इस मंदिर को भारत के 108 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।

धारी देवी मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?

धारी देवी मंदिर इसलिए प्रसिद्ध है क्योंकि यह हिंदू देवी धारी देवी का एक प्राचीन और पवित्र मंदिर है जो गढ़वाल क्षेत्र के पहाड़ों में स्थित है। मंदिर की खूबसूरत वास्तुकला और नवरात्रि पर लगने वाला विशाल मेला इसे और भी लोकप्रिय बनाता है। इस मंदिर में स्थापित धारी देवी की प्रतिमा अत्यंत पवित्र मानी जाती है और यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होने का विश्वास रहा है। ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से यह मंदिर सदियों से लोगों को आकर्षित करता रहा है।

2 thoughts on “Dhari Devi mandir | धारी देवी मंदिर”

  1. मां धारी देवी के मंदिर जाने का मेरा बहुत ही मन है मैं जल्दी ही मां धारी देवी के मंदिर दर्शन करने जाऊंगा

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